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आचारधर्मकी प्रस्तावना

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आचारधर्मकी प्रस्तावना

आचारधर्म अर्थात आध्यात्मिक सिद्धान्तोंके आधारपर जीवनयापन करना !

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Compilers :परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले , सद्गुरू (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळ
Number Of Pages72
ISBN Number978-93-5257-076-5

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आचारधर्म अर्थात आध्यात्मिक सिद्धान्तोंके आधारपर जीवनयापन करना !

आचार: प्रभवो धर्म: । अर्थात धर्म आचारसे उत्पन्न हुआ है । हमारे धार्मिक जीवनकी रचना आचारधर्मपर निर्भर है । धर्माचरण एवं साधनाका उद्देश्य है ईश्‍वरप्राप्ति । धर्माचरण एवं साधना करनेके प्रति मनकी प्रवृत्ति सत्त्वगुणपर निर्भर होती है । साधारण मनुष्य रजोगुणी और तमोगुणी होता है, इसलिए उसकी रुचि साधनामें नहीं होती । आचारधर्मके पालनसे व्यक्तिकी सात्त्विकता धीरे-धीरे बढती है और वह साधनामें रुचि लेेने लगता है ।

प्रस्तुत ग्रन्थमें आचारधर्मका पालन न करनेसे क्या हानि हो सकती है, आचारके अनुसार आचरण कैसे करें, आचारधर्मका योग्य पद्धतिसे पालन करनेके लिए उपयुक्त घटक कौनसे हैंैं आदि बिन्दुओंका विवेचन भी इस ग्रन्थमें दिया गया है ।

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