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राष्ट्र एवं धर्मरक्षाके उपाय

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rashtra evam dharmrakshake upay-bhag 2 (Lang.-hindi)

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पृष्ठसंख्या :६४
ISBN No :978-93-83236-08-4
संकलक :श्री. चित्तरंजन मिहिरकुमार सुराल

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अन्य भाषाएं : मराठी
        १० से १४ जून २०१२ की कालावधिमें रामनाथी, गोवामें ‘हिंदू जनजागृति समिति’की ओरसे प्रथम ‘अखिल भारतीय हिंदू अधिवेशन’ संपन्न हुआ । यह अधिवेशन ‘हिंदू राष्ट्रकी स्थापना’ हेतु बढा प्रथम ऐतिहासिक पग था । इस अधिवेशनमें निरंतर पांच दिनोंतक अनेक हिंदुत्वनिष्ठ मान्यवरोंने विविध राष्ट्रीय एवं धार्मिक समस्याओंका अभ्यासपूर्ण विवेचन किया । इस ऐतिहासिक अधिवेशनमें प्रस्तुत हिंदुत्वनिष्ठ मान्यवरोंके विचार हम तीन ग्रंथमालाके रूपमें प्रस्तुत कर रहे हैं । ग्रंथमालाके इस तीसरे भागमें धर्माभिमानी वक्ताओंके ‘लव जिहाद’, ‘हिंदुओंका धर्मांतरण’, ‘मंदिरोंकी रक्षा’, ‘गोवंशकी रक्षा’ और ‘देवनदी गंगाकी रक्षा’, इन विषयोंपर व्यक्त तेजस्वी विचार इस ग्रंथमें संपादित स्वरूपमें दे रहे हैं । यह विचार हिंदुत्वके क्षेत्रमें कार्य करनेवाले प्रत्येकके लिए प्रेरणादायी होनेके साथ ही जन्महिंदुओंको कर्महिंदू बननेके लिए भी मार्गदर्शक हैं ।

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