सनातनकी राष्ट्र, धर्म एवं अध्यात्मसंबंधी अनमोल ग्रंथसंपदा’ अब www.SanatanShop.com इस जालस्थलपर (वेबसाइटपर) उपलब्ध !

     प्रत्येक मनुष्यको सुखकी (Happiness) नहीं; अपितु आनंदप्राप्तिकी (Bliss की) आंतरिक लगन होती है । इस आनंदप्राप्तिके लिए समय-समयपर उचित मार्गदर्शन मिलनेसे उस जीवका उद्धार होता है । इसके लिए पूर्वकालमें गुरुकुल पद्धति तथा गुरु थे । वर्तमान समयमें समाजकी सात्त्विकताका पतन होनेसे खरे गुरुकी प्राप्ति होना कठिन हो गया है । ऐसेमें करोडों जिज्ञासुओंके लिए ‘ग्रंथ’ ही गुरुका कार्य  करते हैं । ‘सनातन’की अलौकिक ग्रंथसंपदा समाजकी इस आवश्यकताको पूर्ण करती है ।

सनातन ग्रंथसंपदा’के सर्वेसर्वा (सर्वस्व) .पू. डॉ. जयंत बाळाजी आठवलेजीद्वारा अखिल मानवजातिके उद्धारके लिए सैकडों ग्रंथोंकी रचना

    ‘सनातन संस्था’के प्रेरणास्रोत प.पू. डॉ. जयंत बाळाजी आठवलेजीने अखिल मानवजातिके उद्धारके लिए अध्यात्मशास्त्रसहित आयुर्वेद, समाज, राष्ट्र, धर्म इत्यादि विषयोंपर सैकडों ग्रंथोंकी रचना की है । इन ग्रंथोंमें उन्होंने सामान्यजनोंके लिए वेद, उपनिषद, पुराण, विविध शास्त्रोंका अध्यात्मशास्त्रीय आधार सहज एवं सरल भाषामें प्रस्तुत किया है । साथ ही, ‘सनातन’के अनेक साधकोंके मनमें ऊपर दिए गए विविध विषयोंसंबंधी सूत्रोंका स्फुरण होता है । सनातनकी ग्रंथसंपदाकी यह एक विशेषता है । ‘सनातन ग्रंथसंपदा’का लाभ आज पूरे विश्वके लाखों लोगोंको हो रहा है । वर्तमानमें अस्वस्थ होते हुए भी प.पू. डॉक्टरजी ऐसे अनेक ग्रंथोंका लेखन अहर्निश (दिन-रात) कर रहे हैं ।

 

आधुनिक कालकी आवश्यकता - ‘सनातन शॉप’ !

      वर्तमानकी आधुनिक एवं भागदौडकी जीवनशैलीमें समयाभावके कारण सभीके लिए बाहर जाकर ग्रंथ क्रय करना संभव नहीं होता । ऐसेमें लोगोंका अधिक झुकाव ‘ऑनलाईन’ क्रय करनेकी ओर हो गया है । जिज्ञासु ज्ञानप्राप्तिसे वंचित न रहें; इसलिए सनातनकी ग्रंथसंपदा अब www.SanatanShop.com' इस जालस्थलपर उपलब्ध करवाई गई है । अत्याधुनिक सुविधाओंसे युक्त एवं अत्यंत सुलभ पद्धतिसे उपयोग किया जा सके, इस जालस्थलकी ऐसी रचना की गई है । वर्ष २०१३ में मकरसंक्रांतिके दिन प.पू. पांडे महाराजजीके करकमलोंद्वारा ‘सनातन शॉप’का लोकार्पण हुआ, इसका हमें विशेष आनंद हो रहा है । अधिकाधिक जिज्ञासु अध्यात्मशास्त्रको जानकर तदनुसार आचरण कर स्वयंका जीवन आनंदमय बनाएं, भगवान श्रीकृष्णके चरणोंमें यही प्रार्थना ।