श्रीरामरक्षास्तोत्र एवं हनुमानचालीसा (अर्थसहित)

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जिससे देवता का स्तवन किया जाता है, वह है स्तोत्र ! संध्या के समय घर में भगवान के समक्ष दीपक जलाने के उपरांत त्वमेव माता च पिता त्वमेव एवं हनुमान-चालीसा का पाठ करने की प्रथा है । इस लघुग्रंथ में हनुमान-चालीसा के साथ-साथ श्रीरामरक्षास्तोत्र अर्थसहित दिया है तथा कुछ महत्त्वपूर्ण अध्यात्मशास्त्रीय सिद्धांत भी दिए हैं । ग्रन्थ के प्रारंभ में श्रीराम, हनुमान, स्तोत्रों के रचनाकार, मंत्र, कीलक, स्तोत्र एवं कवच की भी उपयुक्त जानकारी दी है । स्तोत्रपठन करनेवाले व्यक्ति के सभी ओर सुरक्षा-कवच निर्मित होता है । स्तोत्रों की फलश्रुति में रचयिता का संकल्प होता है; इसलिए स्तोत्र पठन करने से इच्छापूर्ति, वैभव, पापनाश आदि फलप्राप्ति होती है । अतः अर्थ समझकर स्तोत्र का पाठ करें !

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