संत भक्तराज महाराजको छायाचित्रात्मक श्रद्धांजलि

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    किसी संतका चरित्र पढनेपर उस संत तथा उनके आश्रमके दर्शन करनेकी इच्छा होती है ।

    अबतक हुए ऋषि-मुनि, संत ज्ञानेश्वर, संत तुलसीदास जैसे संतोंके छायाचित्र उपलब्ध नहीं हैं । हमारा परम भाग्य है कि संत भक्तराज महाराजजीके छायाचित्र उपलब्ध हैं । इन ग्रंथोंके छायाचित्रोंमें महाराजजीकी विविध भाव-अवस्थाओंके दर्शन होते हैं ।

    शब्द, स्पर्श, रूप, रस, गंध एवं उनकी शक्ति अथवा चैतन्यका सह-अस्तित्व होता है । इस नियमानुसार जिस प्रकार नामके साथ शक्ति अथवा चैतन्य आता है, उसी प्रकार रूपद्वारा भी वह शक्ति अथवा चैतन्य प्रक्षेपित होता है । महाराजजीके ‘दर्शन’ करते समय भी साधकोंको यही अनुभूति होगी ।

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