स्वभावदोष एवं अहं की विविध अभिव्यक्तियोंका विश्लेषण (सुचारू व्यष्टि साधनाके साथ ही आनन्दमय जीवन हेतु उपयुक्त !)

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स्वभावदोष और अहं ईश्वरप्राप्तिकी साधनामें दो बडी बाधाएं हैं । इनके कारण व्यक्तिगत जीवन दुःखी होता है और व्यक्तित्वका विकास भी रुक जाता है । स्वभावदोष और अहं के निर्मूलनकी प्रक्रिया करनेके लिए अनेक साधक भारतके अनेक राज्योंसे सनातनके रामनाथी, गोवा स्थित आश्रममें आते हैं । आश्रमकी पाकशाला इस प्रक्रियाका केन्द्र है; क्योंकि रसोई विभागकी पूज्य रेखा काणकोणकर और श्रीमती सुप्रिया माथुर साधकों को प्रक्रिया समझाती हैं तथा पाकशाला में सेवा के माध्यम से साधक प्रक्रियाका प्रायोगिक भाग भी सीख पाते हैं । परिणामस्वरूप सैकडों साधक कुछ महीनोंमें ही उचित साधना करने लगते हैं ।

वर्ष २०१६ के मार्च, अप्रैल और मई महीनेमें सनातनकी ज्ञानप्राप्तकर्त्री साधिका कुमारी मधुरा भोसले को श्रीमती सुप्रिया माथुरके ऐसे सत्संगोंमें उपस्थित रहनेका अवसर मिला । श्रीमती सुप्रिया माथुरके मार्गदर्शनको कु. मधुरा भोसलेने इस ग्रन्थमें बहुत सुन्दर ढंगसे संकलित किया है । इससे सभी साधकोंको स्वभावदोष और अहं निर्मूलन प्रक्रियाकी दिशा मिलेगी ।

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