पापोंके दुष्परिणाम दूर करनेके लिए प्रायश्चित्त

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हिन्दू धर्मने विविध पापोंकी सूची बनाकर, पापकी तीव्रतानुसार विविध प्रकारके प्रायश्‍चित (देहांत प्रायश्‍चित भी) बताए हैं ।
पापका दुष्प्रभाव दूर करनेके लिए कुछ धर्मशास्त्रीय मार्ग इस ग्रंथमें बताए गए हैं ।
पुण्य-पापात्मक कर्मोंसे उत्पन्न होनेवाले सुख-दुःख के बंधनोंसे परे जाकर,निरंतर सच्चिदानंद अवस्था अनुभव करनेके लिए ऐसे कर्म करने पडते हैं कि जिससे कर्मफल न मिले ।
कर्मोंसे होनेवाली हानि टालनेके लिए क्या करें, यह भी इस ग्रंथमें बताया गया है ।

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