मालेगांव बम-विस्फोट के पीछे का अदृश्य हाथ

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मालेगांव में २००६ तथा २००८ में हुए बम-विस्फोटों के प्रकरण में आतंकवाद विरोधी पथक, राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण तथा तत्कालीन कांग्रेस शासन ने केवल भगवा आतंकवाद का अस्तित्व है, यह सिद्ध करने हेतु इस बम-विस्फोटों से दूर-दूर तक कोई संबंध न रखनेवाले निर्दोष हिन्दुआें को पकडा । वही आरोपी हैं, यह सिद्ध करने हेतु आतंकवाद विरोधी पथक ने एक अत्यंत भयावह चक्रव्यूह रचकर उनपर अनगिनत अत्याचार किए । सत्ता के लिए शासन कितने निचले स्तर तक जा सकता है, यह इससे सिद्ध हुआ । कैसे, यह जानने के लिए पढें…

  • साध्वी प्रज्ञासिंह को आरोपी बनाने के लिए रची गई कपोलकल्पित कहानी
  • निर्दोष सुधाकर चतुर्वेदी पर हुए क्रूर अत्याचार का वर्णन
  • लापता दिलीप पाटीदार की अनसुलझी गुत्थी
  • कर्नल पुरोहित पर लगे आरोपों का फज्जा
  • प्रसारमाध्यमों की असफलता… और बहुत कुछ…

श्री. विक्रम भावे ने इन आरोपियों से प्रत्यक्ष बात कर तथा सूचना के अधिकार के अंतंर्गत उनके संदर्भ में जानकारी पाकर सत्य घटनाआें को उजागर करनेवाला यह आलेख बम-विस्फोटों के पीछे छुपे अदृश्य हाथ को रेखांकित करता है… इसके लिए प्रत्येक धर्माभिमानी हिन्दू के लिए अवश्य पठनीय ग्रंथ ।

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