सात्त्विक देवनागरी लिपिके अक्षर और अंक लिखनेकी पद्धति

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मेरे बच्चेकी लिखाई स्पष्ट, घुमावदार और सुन्दर हो, यह सभी अभिभावकोंकी इच्छा होती है ।
इसके लिए जब आपका बच्चा अ, आ, इ, ई…. लिखना सीखता है, तभी यत्न करने चाहिए । उससे अक्षर लिखवाते समय उस प्रकारका अभ्यास करवाना चाहिए; क्योंकि यदि यह नींव दृढ नहीं होगी, तो उसे सुन्दर अक्षर बनानेकी प्रेरणा नहीं मिलेगी और उसपर वह संस्कार नहीं होगा ।
यह ग्रन्थ पढकर अभिभावकों और शिक्षकों को बच्चोंपर सात्त्विक संस्कार करनेमें सहायता मिलेगी । परिवारके बडे भी अपनी लिखाई सुधारनेका यत्न कर सकते हैं ।
इस ग्रन्थका एकमात्र उद्देश्य है, अक्षरयोगकी अनुभूति देनेवाले सात्त्विक अक्षरोंकी रचना सिखाना ।

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