आनन्दप्राप्ति हेतु अध्यात्म (सुख, दुःख एवं आनन्द का अध्यात्मशास्त्रीय विश्‍लेषण)

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केवल मनुष्यकी ही नहीं, अपितु अन्य प्राणिमात्रोंकी भागदौड भी अधिकाधिक सुखप्राप्तिके लिए ही होती है । इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति पंचज्ञानेंद्रिय, मन एवं बुद्धिद्वारा विषयसुख भोगनेका प्रयत्न करता है; परंतु विषयसुख तात्कालिक एवं निम्न श्रेणीका होता है, तो दूसरी ओर आत्मसुख, अर्थात आनंद चिरकालीन एवं सर्वोच्च श्रेणीका होता है । अध्यात्म वह शास्त्र है, जो आत्मसुख प्राप्त करवाता है । केवल बौद्धिक स्तरपर अध्यात्मको नहीं समझा जा सकता; यह तो प्रत्यक्ष कृत्यद्वारा अनुभूत करनेका विषय है ।

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