अपने स्वभावदोष कैसे ढूंढें ? (उत्तम साधना एवं आदर्श जीवनके लिए उपयुक्त !)

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मानवीय मनके गुण-दोष एक ही सिक्के (धातुमुद्रा) के दो पहलू हैं । इसलिए अपने मनके अध्ययनमें स्वभावके गुण-दोष ढूंढना आवश्यक है । प्रस्तुत ग्रंथमें विस्तृतरूपसे बताया गया है कि,

१. स्वयं ही अपने गुण-दोष कैसे पहचानें

२. स्वभावदोष-निर्मूलन प्रक्रियाके माध्यमसे अंतर्मुखता साध्य कर सुखप्राप्ति हेतु स्वयंमें आवश्यक परिवर्तन कैसे लाएं ।

३. स्वभावदोष-निर्मूलन सारणीका स्वरूप

४. योग्य कृति निश्‍चित करनेकी पद्धति

५. अयोग्य प्रतिक्रियाका/ कृतिका अभ्यास कर स्वभावदोष ढूंढनेकी पद्धति

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