श्री गणेशमूर्ती धर्मशास्त्रानुसार हो !

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श्री गणेशमूर्ति सात्त्विक, अर्थात धर्मशास्त्रानुसार होनेपर ही बडी मात्रामें गणेशतत्त्व प्राप्त होता है ।
वर्तमानमें गरुडपर बैठे गणेश, क्रिकेट खेलनेवाले गणेश, ऐसे विविध रूपोंमें एवं विशालकाय गणेशमूर्तियां बनाई जाती हैं । ऐसी अशास्त्रीय मूर्तियोंके कारण गणेशतत्त्वका लाभ तो नहीं होता; परंतु उनका अनादर अवश्य होता है । इस अनादरके लिए मूर्तिकार, श्रद्धालु एवं गणेशोत्सव मंडलके सभी सदस्य उत्तरदायी होते हैं । इस अनादरसे हिंदुओंको समष्टि पाप लगता है ।
यह समष्टि पाप न लगे तथा श्री गणेशजीकी उपासना उचित पद्धतिसे हो, इस उद्देश्यसे प्रस्तुत लघुग्रंथमें श्री गणेशमूर्ति धर्मशास्त्रानुसार बनानेसे होनेवाले लाभ; मूर्तिकार, श्रद्धालु तथा गणेशोत्सव मंडलोंके लिए आवश्यक सावधानियां आदिका विवेचन किया गया है ।

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