स्थानकी उपलब्धताके अनुसार औषधीय वनस्पतियोंका रोपण

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बचपनमें सर्दी-खांसी-ज्वर होनेपर दादीने हमें तुलसीका काढा पिलाया और एक घण्टेमें ही पसीना आकर हमें अच्छा लगा, यह आपको याद होगा।
‘एलोपैथी’ने हमें दिनमें तीन बार ‘एक श्‍वेत गोली – एक पीली गोली’ लेना सिखाया और हम आयुर्वेदको भूल गए; परन्तु अब हमें आयुर्वेदकी ओर मुडना ही होगा ।
प्रस्तुत ग्रन्थमें २०० से अधिक औषधीय वनस्पतियोंका समावेश किया गया है । सदनिकाके (‘फ्लैट’के) बरामदेमें (गैलरीमें) लगानेयोग्य, घरके पिछवाडेमें लगानेयोग्य, परती भूमिमें अत्यल्प श्रम कर लगानेयोग्य तथा बीच फसलमें अंतर्वर्ती फसलके रूपमें लगानेयोग्य औषधीय वनस्पति, ऐसा उनका वर्गीकरण किया है ।

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