पूजासामग्रीका महत्त्व

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धार्मिक कृत्योंमें दैनिक पूजा-अर्चना समाहित है । प्रस्तुत ग्रंथमें अक्षत (अखंड चावल), श्रीफल, पीढेके चारों ओर रंगोली बनाना एवं उसपर हल्दी-कुमकुम लगाना, साथ ही नीरांजनकी (सकर्णक दीपकी) दो बातियोंसे बनी एक बातीका शास्त्र, पूजाकी थालीमें सामग्रीकी रचना, पूजामें दक्षिणा रखनेका कारण, इन सभीका अध्यात्मशास्त्रीय महत्त्व दिया गया है । इसे समझ लेनेसे पूजकके मनमें उनके प्रति श्रद्धा उत्पन्न होती है । इस श्रद्धाके कारण पूजा भावपूर्वक होती है एवं पूजकको पूजाके चैतन्यका लाभ होता है । इस ग्रंथमें दैनिक पूजा-अर्चा अंतर्गत प्रत्येक कृत्यका विश्लेषण वैज्ञानिक परिभाषामें दिया गया है, जो इस ग्रंथकी अनोखी विशेषता हैं ।

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