अध्यात्मका प्रस्तावनात्मक विवेचन

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जीवनको आनंदमय बनाने एवं ईश्वरप्राप्ति करने हेतु केवल पूजापाठ, व्रत आदि पर्याप्त नहीं; अपितु उससे आगे बढकर ‘साधना’ करना आवश्यक है।
धर्मशास्त्रमें साधना करनेके सहस्रों मार्ग बताए हैं । इनमेंसे कौनसा अपनाना चाहिए, यह अधिकांश लोगोंको ज्ञात नहीं रहता ।
अपने मनसे कोई मार्ग चुनकर साधना करते रहनेपर अनेक बार अपेक्षित आनंदप्राप्ति नहीं होती एवं इस कारण साधक निराश हो सकता है ।
इससे बचनेके लिए धर्मशास्त्रद्वारा कालानुसार बताई साधना है, कुलदेवताका नामजप करना, सत्संगमें रहना, सत्सेवा करना, षड्-रिपु निर्मूलन एवं अहंनिर्मूलन हेतु प्रयत्न करना आदि । इस साधनाके विषयमें मार्गदर्शन करनेवाला ग्रंथ !

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