स्वसूचनाओंद्वारा स्वभावदोष निर्मूलन (उत्तम साधना एवं आनन्दमय जीवन हेतु उपयुक्त!)

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अपने स्वभावदोषोंका और ‘उन स्वभावदोषोंके कारण होनेवाली अयोग्य कृतियोंके समय योग्य कृति क्या करनी चाहिए’, इसका भान मनको होनेके लिए अथवा ‘स्वभावदोषों के कारण मनमें उभरी अयोग्य प्रतिक्रियाएं पुनः उत्पन्न न हों, इसके लिए योग्य दृष्टिकोण क्या रखना चाहिए’, यह मन समझ पाए इसके लिए स्वयंसूचनाएं देनी पडती हैं ।
ये स्वयंसूचनाएं कैसे बनाते हैं, मनको कैसे देते हैं, दिनभरमें कितनी बार स्वयंसूचना लेनी चाहिए आदिकी जानकारी इस ग्रंथमें दी है ।
यह एक वैज्ञानिक एवं अनुभवसिद्ध उपचारपद्धति है ।

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