देवालयमें देवताके प्रत्यक्ष दर्शनसे पूर्वके कृत्योंका अध्यात्मशास्त्र

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  • हाथ-पैर धोकर देवालयमें क्यों प्रवेश करना चाहिए ?
  • देवताके दर्शनके लिए जाते समय भाव कैसा हो ?
  • देवताके दर्शन करते समय प्रार्थना क्या करनी चाहिए ?
  • देवताकी परिक्रमा कितनी, कैसे एवं क्यों करनी चाहिए ?
  • देवताके चरणोंमें धन, नारियल आदि अर्पण करनेका महत्त्व क्या है ?

ऐसे विविध प्रश्नोंके अध्यात्मशास्त्रीय उत्तर इस ग्रंथमालामें दिए हैं ।

मानवके अंतिम ध्येय – ‘ईश्वरप्राप्ति ’को साध्य करनेकी दृष्टिसे हिन्दू धर्मके प्रत्येक धार्मिक कृत्यके पीछे कितना गहन एवं सूक्ष्म विचार किया है, इसका दर्शन भी इस ग्रंथमालाके पठनसे पग-पगपर होगा ।

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