प्रार्थना (महत्त्व एवं उदाहरण)

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कहते हैं, ‘सवेरे प्रार्थनाके सूर्यसे दिनका स्वागत करें और रातमें प्रार्थनाके चंद्रमासे उसे विदा करें’ ।
दैनिक भागदौडमें हम अपनी मानसिक शांति खो बैठते हैं । वह शांति एवं मानसिक शक्ति प्रार्थनासे प्राप्त होती है । प्रार्थना करनेपर असंभव भी संभव लगने लगता है; क्योंकि उसके कारण श्रद्धाका बल प्राप्त होता है, साथ ही ईश्वरके आशीर्वाद भी मिलते हैं । प्रार्थनाका महत्त्व वैज्ञानिकोंने भी स्वीकारा है । ‘प्रार्थनाका स्वास्थ्यपर अच्छा परिणाम होता है’, ऐसा जापानी वैज्ञानिक डॉ. मासारू इमोटो कहते हैं । साधना (ईश्वरप्राप्ति हेतु प्रतिदिन किए जानेवाले प्रयत्न) करनेवालोंके लिए तो प्रार्थना निरंतर ईश्वरसे आंतरिक सान्निध्यमें रहनेका अनमोल साधन ही है ।
सवेरे उठनेसे रातको सोनेतकके कृत्य करते समय; साथ ही अध्ययन, रोग, सेवा आदि अवसरोंपर उपयुक्त सरल प्रार्थनाएं इस लघुग्रंथमें दी हैं । छात्र, गृहिणी, वैद्य, कार्यालयीन कर्मचारी, अभियंता, किसान, साधक, राष्ट्राभिमानी एवं धर्माभिमानी आदि सभीके लिए वे उपयुक्त सिद्ध होंगी । इसके साथ ही दैनिक पूजा-अर्चना, त्यौहार, उत्सव, दिनचर्या, रोग, क्रय (खरीदारी) आदि अवसरोंपर कौनसी प्रार्थनाएं करें, यह भी इस लघुग्रंथसे ज्ञात होंगी ।

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