पूजापूर्व व्यक्तिगत व्यवस्था

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घर-घरमें नित्य नियमसे किए जानेवाले देवतापूजनसे पूजक सहजतासे ईश्वरीय चैतन्य ग्रहण कर पाता है । पूजा करनेसे पूर्व पूजककी सात्त्विकता (सत्त्वगुणकी मात्रा) जितनी बढेगी, उतना वह पूजासे ईश्वरीय चैतन्य अधिक ग्रहण करता है । पूजककी व्यक्तिगत सिद्धता (तैयारी) उसकी सात्त्विकता बढानेमें लाभदायक होती है ।

देवतापूजनके लिए सिद्ध (तैयार) होते समय

  • पुरुषको शर्ट-पैंटकी अपेक्षा धोती-उपवस्त्र एवं स्त्रीको छः गजकी साडीकी अपेक्षा नौ गजकी साडी क्यों धारण करनी चाहिए,
  • पुरुषको उपवस्त्र बाएं कंधेपर क्यों लेना चाहिए,
  • पूजकको गहरे रंगके वस्त्र क्यों धारण करने चाहिए,
  • स्त्रीको सिरपर पल्लू क्यों लेना चाहिए,

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