भोजनके समय एवं उसके उपरांतके आचार

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प्रस्तुत ग्रंथमें भोजनके कुछ पदार्थ और उनका महत्त्व, भोजनके समयके आचारोंका (उदा. दाहिने हाथसे भोजन, कांटे-चम्मचकी अपेक्षा हाथसे भोजन, दाल-चावलसे भोजन प्रारंभ करना, अंतमें थालीमें कुछ भी न छोडना) तथा भोजनोपरांतके आचारोंका (उदा. सौंफ अथवा पान खाना, दोपहरमें वामकुक्षी (बाईं करवट) करना) अध्यात्मशास्त्रीय आधार इत्यादिका विवेचन किया है ।

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