अलंकारोंका महत्त्व (अलंकार अर्थात सात्त्विकता प्रदान करनेवाली संपदा !)

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अलंकार हिन्दू संस्कृतिकी अनमोल धरोहर है । समयके परिवर्तनके साथ हिन्दू संस्कृतिपर पश्चिमी संस्कृतिका रंग चढा । अलंकाररूपी धरोहरकी ओर अनदेखी होने लगी ।
इस ग्रंथमालाका मूल उद्देश्य यह अध्यात्मशास्त्रीय दृष्टिकोण देना है कि ‘अलंकार अर्थात दैवी कृपा- प्राप्तिमें सहायक साधन’ । अलंकार पहननेसे ईश्वरीय शक्ति एवं चैतन्य प्राप्त होते हैं, शरीरकी काली (अनिष्ट) शक्ति घटकर अनिष्ट शक्तियोंसे हमारी रक्षा होती है, अलंकार पहने हुए अंगोंपर ‘सूचीदाब (एक्यूप्रेशर)’ उपाय होते हैं । अलंकारोंका यह महत्त्व बतानेवाले ऐसे अनेक अन्य ग्रन्थोंमें शास्त्रसहित स्पष्ट किए गए हैं ।

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