सात्त्विक आहारका महत्त्व

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सात्त्विक आहारके सेवनसे हमारा शरीर, मन और बुद्धि सात्त्विक बनती है, जबकि मांस एवं मदिराके सेवनसे व्याक्ति तमोगुणी बनता है ।
वास्तवमें मांसाहार मनुष्यका आहार ही नहीं है । सृष्टिके निर्माताने मांसाहारकी निर्मिति मानवके लिए नहीं की है ।
आधुनिक आहारविशेषज्ञ स्पष्टरूपसे यह नहीं बताते कि शाकाहार अथवा मांसाहारमें क्या श्रेष्ठ है ।
सात्त्विक आहारका महत्त्व और तामसिक आहारके कारण होनेवाली हानि समझमें आना, व्यक्ति और फलस्वरूप समाजका जीवन सुखी बनानेमें सहायक होगा ।

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