गुण बढाकर आदर्श बनें !

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आदर्श विद्यार्थीकी सभी प्रशंसा करते हैं । पाठशालामें, घरमें तथा अन्यत्र उसकी प्रशंसा होती है ।
हमारा आचरण आदर्श होने हेतु हममें सद्गुण निर्माण होना आवश्यक है ।
भगवानको भी सद्गुणी बच्चे प्रिय हैं; क्योंकि वे स्वयं आनन्दमें रहकर अन्योंको भी आनन्द देते हैं ।
प्रस्तुत ग्रन्थमें स्वावलम्बन, एकाग्रता, आज्ञापालन, राष्ट्राभिमान, धर्माचरण आदि गुण बढाने हेतु बच्चोंको कैसे प्रयत्न करने चाहिए, इसका सरल विवेचन किया है । दोष दूर करने और गुण बढानेवाले सनातनके कुछ बालसाधकोंके उदाहरण भी दिए हैं ।
इन्हें पढकर अन्योंको भी प्रेरणा मिलेगी ।

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