स्वभावदोष-निर्मूलन हेतु आध्यात्मिक स्तरके प्रयास

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‘स्वभावदोष-निर्मूलन प्रक्रिया’ रज-तमसे बने स्वभावदोष दूर करने तथा अन्तर्मुखता बढाने में सहायक होती है । स्वभावदोषोंकी व्याप्तिका विचार करें, तो इन्हें सागरमें तैरनेवाले विशालकाय हिम-खण्डोंकी उपमा देना उचित होगा । जिस प्रकार हिम-खण्डका अधिकांश भाग सागरमें डूबा रहता है, उसी प्रकार स्वभावदोष अन्तःकरणकी गहराईमें बसे होते हैं । इन्हें शीघ्र दूर करनेके लिए स्वभावदोष बढानेमें कारणभूत आध्यात्मिक घटक (जैसे – काम-क्रोधादि षड्रिपु, भय, ‘मैं’पन (अहं) आदि) का उच्चाटन आवश्यक होता है । स्वभावदोेष-निर्मूलन प्रक्रिया अधिक अच्छे ढंगसे करनेमें आध्यात्मिक स्तरपर प्रयास किस प्रकार सहायक होते हैं, इसका विस्तृत विश्‍लेषण इस ग्रन्थमें किया गया है ।

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