गुरुका शिष्योंको सिखाना एवं गुरु-शिष्य सम्बन्ध

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साधक एवं शिष्योंको क्या करना चाहिए और किसका परित्याग करना चाहिए आदि का ज्ञान गुरु देते हैं । केवल उपदेशसे नहीं, अपितु साधारण तीत होनेवाले बोलचालसे भी वे बहुत कुछ सिखा देते हैं । साधक तथा शिष्योंको गुरुके बोलचालका भावार्थ समझमें न आनेपर वे उनके अनमोल विचारधनसे वंचित रह जाते हैं । गुरुकी सिखानेकी विविध पद्धतियां होती हैं, उदा. विनोदसे, स्वप्नसे, अनुभूतिसे, परीक्षासे तथा सूक्ष्मसे । स्तुत ग्रन्थमें इन सर्व पद्धतियोंको उदाहरणसहित समझाया गया है ।

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